ब्राहमण
जन्म से मैं ब्राहमण हूँ
पर ..मैं
श्राद्ध, नवरात्र आदि कुछ नहीं जानता...
जानकर भी क्या करूँगा ?
कभी समाज की दशा - दिशा ब्राह्मण तय करते थे
ऐसा मैंने सुना है...
पर...
आज कुछ दिखने वाले और
कुछ अद्रश्य अमर मणि जेसे
ब्राह्मणों से समाज भरा है
फिर....
मैं ब्राहमण रह कर क्या करूँगा...?
हेम चंदर पाण्डेय


1 comment:
शाबाश !
मुबारक हो
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