Tuesday, October 7, 2008

परिवर्तन

अभी कुछ समय से
एक अजीब सा परिवर्तन
मैं...
अपने अंदर महसूस कर रहा हूँ
किसी को भी
चाहे ...अध्यापक , डॉक्टर , वकील और
कल तो हद हो गई जब
एक पहुचे हुए संत को सामने पाकर
उनसे ही पूछ बैठा
" धंदा कैसा चल रहा हैं "

Monday, October 6, 2008

मुर्ख

मैं इतना मुर्ख भी नही
की...
एक अकेला इन्सान पत्थर से सोना ..आदि ..इत्यादि
अर्थात आपकी सब समस्याओं
को चुटकी बजा कर हल कर सकता है ..को यकीं कर लू
पर ..मैं तो सिर्फ़
सिर्फ़ और सिर्फ़ वो गहराई देखना चाहता हूँ
की...
वह कहाँ तक गिर सकता है ...?

दुनियादारी

जब आपका दिल करे
सामने वाले का वजन तोलकर
बात करें ... और अपना उलू साधे
जब आपका स्वार्थ सध जाए, आगे बद जाए
फिर किसी और का वजन तोलकर
बातों को आगे बदाये ....
आगे बड़ते जाए ...
बस इसी तरह दुनियादारी आ ही जायेगी ...

Wednesday, September 24, 2008

पड़ोसी



मुनिसिप्लिटी के नल में
पानी की किलत ने
मैं और मेरे पड़ोसी के
मजबूत संबंधो की पोल खोल दी हे

Thursday, September 18, 2008

आतंकवाद

दुसरे तरह के, मसलन बड़े - बड़े सफेदपोश चोरों से निपटने के लिए इस्तेमाल करे । फिर में भी देखू कौन इस देश को सोने की चिडिया बनने से रोक सकता हें ......... बाकि फिर ...आतंकवाद पर तरह तरह की बातें हो रही हैं .... कैसा आतंकवाद कहाँ का आतंकवाद ... क्या हें आतंकवाद । हमारे फ्लेक्सिबल कानून की नाजायज औलाद हें आतंकवाद । पकडें ... और जल्द से जल्द सख्त कानूनों से उसको निपटे .....बिगर किसी भेदभाव के । यहाँ भेदभाव न होने वाली बात सबसे अहम् हें, चाहे किसी भी धर्म, जात, पंथ से हो । अपराधी सिद्ध होने पर उसको कड़ी से कड़ी सजा (मौत ) न सिर्फ़ दी जाए बल्कि इसकी ज्यादा से ज्यादा पब्लिसिटी की जाए। फिर देखिये आतंकवादी, बलात्कारी , चोरों को आप ढूँढ़ते रह जायेंगे ... इसी तरह की कार्यप्रणाली ....हे कहाँ हमारे देश मैं जनाब.....

समझदार !!

ईमानदार ...
और कौन समझदार....?
इस माहौल में
वक्त की नजाकत समझकर , सामने वाले की नब्ज़ पहचान कर ...
गिरगिट की तरह रंग बदल ले सामने वाले के आगे अपना वजन देख कर
सिर्फ़... और सिर्फ़ ....
वही थानेदार,ईमानदार और समझदार है ...

Wednesday, June 4, 2008

fm channel 93.5

आजकल ऑफिस आते समय में 93.5 सुनता हुआ आता हू, उसमे नितिन ने झूटिया शुरू किया हे, जहाँ वह अपनी मशीन पर लोगों के झूट पकड़ता हे ! क्या वह अपनी मशीन पर हमारे राजनेताओ को नहीं बिठा सकता हे जिससे उनके काले कारनामो के बारे में पता चल सके ........आपके क्या विचार हे ?.

खोज !

मैंने सुना है...
कभी बोस ने कहा था
अगर कुछ इस देश को सुधारेगा
तों केवल दस साल तक लगातार आपातकाल
पर
ये पुरानी बात है....
वक्त बदल गया...
आज मेरे पास समाधान हैं
आज अगर इस देश को सुधारेगा तो केवल
नीचे के पद से शुरू करके ऊपर तक
सभी कर्मचारियों को डंडे मारे जाए ...
उनके वेतन के अनुपात में ...
और तभी केवल एक सप्ताह....दस साल नहीं
में यह देश सही दिशा में चल पड़ेगा !
पर...
हर डाल पर उल्लू बैठा है ..
वो डंडे मारने वाले कहाँ से लाऊं ...?

Tuesday, June 3, 2008

ब्राहमण

ब्राहमण
जन्म से मैं ब्राहमण हूँ
पर ..मैं
श्राद्ध, नवरात्र आदि कुछ नहीं जानता...
जानकर भी क्या करूँगा ?
कभी समाज की दशा - दिशा ब्राह्मण तय करते थे
ऐसा मैंने सुना है...
पर...
आज कुछ दिखने वाले और
कुछ अद्रश्य अमर मणि जेसे
ब्राह्मणों से समाज भरा है
फिर....
मैं ब्राहमण रह कर क्या करूँगा...?
हेम चंदर पाण्डेय

सन्दर्भ

हम नेता हैं
कानून हम ऐसा बनाये कि,
पकडे जाने पर कुछ समय
टूरिस्ट लोज में काट आए
पूछे कोई और तो उसे
सन्दर्भ याद दिलाये
इन सब बातों में 15-20 साल गुजर जायें
और ....कभी सजा हो भी जाए तो परलोक सिधार जायें....

हेम चंदर पांडेय

प्रेरणा

धन्यवाद देता हूँ सक्सेना जी को