अभी कुछ समय से
एक अजीब सा परिवर्तन
मैं...
अपने अंदर महसूस कर रहा हूँ
किसी को भी
चाहे ...अध्यापक , डॉक्टर , वकील और
कल तो हद हो गई जब
एक पहुचे हुए संत को सामने पाकर
उनसे ही पूछ बैठा
" धंदा कैसा चल रहा हैं "
झाडू वाले
5 weeks ago


2 comments:
बहुत गूढ़ लिखा है आपने ! आज के समय में आपकी सोच हम सब के बारे में ग़लत कहाँ है पाण्डेय जी ! और पंहुचे हुओं का तो कहना ही क्या ?
आपकी रचनाओं का स्तर बेहतरीन है ! कृपया लिखते रहें,
मेरी शुभकामनायें !
dhanyawad chaliye isi bahane kuch to mila....
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