Tuesday, October 7, 2008

परिवर्तन

अभी कुछ समय से
एक अजीब सा परिवर्तन
मैं...
अपने अंदर महसूस कर रहा हूँ
किसी को भी
चाहे ...अध्यापक , डॉक्टर , वकील और
कल तो हद हो गई जब
एक पहुचे हुए संत को सामने पाकर
उनसे ही पूछ बैठा
" धंदा कैसा चल रहा हैं "

2 comments:

Satish Saxena said...

बहुत गूढ़ लिखा है आपने ! आज के समय में आपकी सोच हम सब के बारे में ग़लत कहाँ है पाण्डेय जी ! और पंहुचे हुओं का तो कहना ही क्या ?
आपकी रचनाओं का स्तर बेहतरीन है ! कृपया लिखते रहें,
मेरी शुभकामनायें !

Hem chander Pandey said...

dhanyawad chaliye isi bahane kuch to mila....