कहाँ से ढूंडू
एक आदर्श तुम्हारे लिए मेरे बच्चो
अभी जब तुम अपने कपड़ों के बटन भी.....
मेरे बगेर नहीं लगा सकते
तब ....
जवान शीला, बदनाम मुन्नी को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते
कहाँ पहुचेगी ... मैं नहीं जानता
और
जिनसे मैं आशा करता था
कि... करेंगे कुछ इन संबोधनों का
वो खुद ही कहीं 'आदर्श' तो कहीं 'राष्ट्रकुल' का बोझ अपने कमजोर कंधो पर लादे फिर रहें हें .......
झाडू वाले
5 weeks ago


1 comment:
शाबाश , कविवर !
बढ़िया लिख रहे हो यार !
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