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आतंकवाद
दुसरे तरह के, मसलन बड़े - बड़े सफेदपोश चोरों से निपटने के लिए इस्तेमाल करे । फिर में भी देखू कौन इस देश को सोने की चिडिया बनने से रोक सकता हें ......... बाकि फिर ...आतंकवाद पर तरह तरह की बातें हो रही हैं .... कैसा आतंकवाद कहाँ का आतंकवाद ... क्या हें आतंकवाद । हमारे फ्लेक्सिबल कानून की नाजायज औलाद हें आतंकवाद । पकडें ... और जल्द से जल्द सख्त कानूनों से उसको निपटे .....बिगर किसी भेदभाव के । यहाँ भेदभाव न होने वाली बात सबसे अहम् हें, चाहे किसी भी धर्म, जात, पंथ से हो । अपराधी सिद्ध होने पर उसको कड़ी से कड़ी सजा (मौत ) न सिर्फ़ दी जाए बल्कि इसकी ज्यादा से ज्यादा पब्लिसिटी की जाए। फिर देखिये आतंकवादी, बलात्कारी , चोरों को आप ढूँढ़ते रह जायेंगे ... इसी तरह की कार्यप्रणाली ....हे कहाँ हमारे देश मैं जनाब.....
1 comment:
शाबाश, लगता है पकिस्तान में हो दोस्त , भारतीय लोकतंत्र में आपके अरमान सपने जैसे ही रह जायेंगे ! शुभकामनायें !
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